जुलाई 2016
अंक - 16 | कुल अंक - 61
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल गीत

सूरज को हम क्या बोलें

 
माँ, चंदा को मामा कहते
सूरज को हम क्या बोलें?
कितना सुंदर दिखता है वो
प्रातः जब आँखें खोलें।
 
बेटे, सूरज सकल जगत को
नवजीवन रस देता है।
नई सुबह को रोज़ बुलाकर
नव प्रकाश भर देता है।
 
नमन करो निस दिन सूरज को
प्रातः जब आँखें खोलो।
वह तो जगत पिता है बेटे
देव तुल्य है, जय बोलो।
 
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चन्दा मामा
 
चन्दामामा प्यारे प्यारे
मुझे बहुत हो भाते।
मगर क्यों नहीं साथ हमारे
कभी खेलने आते?
 
मित्र सदा ही झिलमिल तारे
साथ तुम्हारे रहते।
मगर यहाँ आने से क्या वो
मना तुम्हें हैं करते?
 
पंख पहन मैं परी बनूँगी
उड़कर आ जाऊँगी
आसमान से मामा तुमको
घर अपने लाऊँगी।
 
ढूँढेंगे फिर तुम्हें सितारे
लेकिन तुम न मिलोगे।
वे तो रोएँगे तुम बिन, तुम
मेरे साथ रहोगे।
 
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तितली रानी
 
तितली रानी, पंख तुम्हारे
सबको बहुत लुभाते हैं।
इसीलिए मुस्काकर तुमको
फूल समीप बुलाते हैं।
 
छिप जाती हो जब फूलों में
मैं उदास हो जाती हूँ।
हर डाली से घूम-घूम कर
पूछ-पूछ थक जाती हूँ।
 
क्या तुम मेरी मित्र बनोगी?
झूले पर मिल बैठेंगे।
दौड़-दौड़ कर फुलवारी में
छुपा-छुपी भी खेलेंगे।
 
देखो मुझसे रूठ न जाना
सपनों में आती रहना।
डरना मत, मैं प्यार करूँ तो
एक बार बस कह दो हाँ!
 

- कल्पना रामानी

रचनाकार परिचय
कल्पना रामानी

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