नवम्बर-दिसम्बर 2015 (संयुक्तांक)
अंक - 9 | कुल अंक - 61
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल
ग़ज़ल
 
महब्बत की बस्ती बसायेंगे फिर से
कि नफ़रत दिलों से मिटायेंगे फिर से
 
ईसाई, मुसलमान, हिन्दू न बनकर
हम इंसां को इंसां बनायेंगे फिर से
 
जो लाशों पे चढ़कर बड़ा बन रहा है
जगह उसको उसकी बतायेंगे फिर से
 
इरादे हैं नापाक तेरे संभल जा
कि औक़ात तुझको दिखायेंगे फिर से
 
नहीं मीरो-ग़ालिब के घर से तू सागर
ग़ज़ल जो तेरी गुनगुनायेंगे फिर से

- जावेद पठान सागर

रचनाकार परिचय
जावेद पठान सागर

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