मार्च 2020
अंक - 58 | कुल अंक - 61
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्

होलाष्टकम्

 

आदिकालाच्च या विद्यते सौख्यदा

मोददा स्नेहदा नैकवर्णान्विता।

उत्सवस्नेहपूर्णे सदा भारते

होलिकोत्कर्षदा  हर्षदा स्याच्च व:।।1।।

 

पूर्णिमायां तिथौ फाल्गुने पावने

माससर्वोत्तमे भूतले या जनै:।

मान्यते बालवृद्धैस्समै:युवकै:

होलिकोत्कर्षदा  हर्षदा स्याच्च व:।।2।।

 

नैकवर्णान्वितं सुन्दराकर्षकं

वस्त्रचित्रं विचित्रञ्च संधार्य भो।

प्रक्षिपन्तीह बाला:जलं शीतलं

होलिकोत्कर्षदा  हर्षदा स्याच्च व:।।3।।

 

ढक्कया झल्लरीभिस्सदा सर्वदा

गीतनृत्ये च रम्ये नराःभो मुदा।

कुर्वते पर्यटन्त:गृहेषु हृदा

होलिकोत्कर्षदा  हर्षदा स्याच्च व:।।4।।

 

गेहवातायनातुङ्गछद्याश्च वै

ग्रामनार्यस्सुबालाः मनो मोहकम् ।

बालकानाञ्च पश्यन्ति नृत्यन्नवं

होलिकोत्कर्षदा हर्षदा स्याच्च व:।।5।।

 

द्वेषकालुष्यदम्भं विहायाद्य भो

वाग्मनोहारिभि:भूषयन्ति द्विष:।

गंडकेsबीररम्यं विलम्पन्ति वै

होलिकोत्कर्षदा  हर्षदा स्याच्च व:।।6।।

 

शष्कुलिक्षीरशाकानि रम्याणि वै

यानि निर्मान्ति प्रेम्णा मुदा मातर:।

भक्षयन्तीह बालाश्च स्नेहेन वै

होलिकोत्कर्षदा  हर्षदा स्याच्च व:।।7।।

 

द्वेषकालुष्यहीनं भवेज्जीवनं

शान्तिकांतिश्च युक्तं भवेज्जीवनं।

नैकवर्णान्वितं स्याच्च ते जीवनं

होलिका बोधिका सर्वलोकस्य वै।।8।।


- डॉ. आशुतोष द्विवेदी

रचनाकार परिचय
डॉ. आशुतोष द्विवेदी

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