फरवरी 2020
अंक - 57 | कुल अंक - 60
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

हाइकु
वासंती हाइकु
 
मुस्काए फूल,
हवा लगी बौराने,
देख बसंत।
 
मधुमास ने
पछाड़ा पतझड़
हौसला देखो।
 
अमलतास,
खिला मेरे आँगन,
छाया बसंत।
 
बसंत बना
अहसास मन के  
अनुराग का।
 
बसंत लाया
पीले लिफ़ाफ़े में पत्र,
ऋतुराज का।
 
महका गेंदा,
गदराई सरसों,
आया बसंता।
 
मन भंवरा 
कली बनी फुलवा 
निहारे हौले।
 
मन बसंत
तन धरती जैसा
हुलासाए रे।
 
 हे! ऋतुराज
हस्त मदनबाण
न साध लक्ष्य।.
 
पतझड़ ने
कहा मधुमास से
आओ, स्वागत
 
तुम न जाना,
बसंत की तरह,
मौसम संग।
 
पीली पगड़ी,
बाँध आया बसंत
धरा दुल्हन।
 
हरी धरती
पीताम्बर पहने
लगे कान्हा-सी।

- मंजु महिमा

रचनाकार परिचय
मंजु महिमा

पत्रिका में आपका योगदान . . .
कविता-कानन (3)मूल्यांकन (1)हाइकु (5)