अप्रैल 2017
अंक - 25 | कुल अंक - 55
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल-वाटिका

अब कर तू विज्ञान की बातें

परी लोक की कथा सुना मत,
ओरी प्यारी-प्यारी नानी।
झूठे सभी भूत के किस्से,
झूठी है हर प्रेत-कहानी।।

इस धरती की चर्चा कर तू,
बतला नये ज्ञान की बातें।
कैसे ये दिन निकला करता,
कैसे फिर आ जातीं रातें?
क्यों होता यह वर्षा-ऋतु में,
सूखा कहीं-कही पे पानी।

कैसे काम करे कम्प्यूटर,
कैसे चित्र दिखे टीवी पर।
कैसे रीडिंग देता मीटर,
अब कर तू विज्ञान की बातें।
छोड़ पुराने राजा-रानी,
ओरी प्यारी-प्यारी नानी।।


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मम्मी यदि मैं बादल होता

मम्मी यदि मैं बादल होता,
सिर्फ वहीं पर जल बरसाता
जहाँ-जहाँ पर मरुथल होता।

जिसने गेंहू-धान उगाया,
किन्तु नहीं अपने खेतों को
उचित समय पानी दे पाया।
उस किसान का सम्बल होता,
मम्मी यदि मैं बादल होता।।

सागर से जल आता लेकर,
रिमझिम-रिमझिम बारिश करता
नहीं सूखते नदिया-पोखर।
हर-भरा हर जंगल होता,
मम्मी यदि मैं बादल होता।

बेर, आम, ककड़ी की खेती,
सेब, संतरा, केले, लीची
मनमाफिक ये धरती देती।
हर पल बहुत सुखद पल होता,
मम्मी यदि मैं बादल होता।


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कहें आपसे हम बच्चे

भेदभाव की बात न हो,
घायल कोई गात न हो।
पड़े न नफरत दिखलायी,
रहें प्यार से सब भाई।
करें न आँखें नम बच्चे,
कहें आपसे हम बच्चे।।

हम छोटे हैं, आप बड़े
यदि यूँ ही अलगाव गढ़े।
नहीं बचेगी मानवता,
मुरझायेगी प्रेम-लता।
झेलेंगे हम ग़म बच्चे,
कहें आपसे हम बच्चे।।

 


- रमेश राज

रचनाकार परिचय
रमेश राज

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