प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2016
अंक -52

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

मन के रंग

"मोंटू बेटे ! आज तूने  फिर अपना  टिफ़िन  छोड़ दियाआज तो तेरी मनपसंद आलू की सब्ज़ी दी थी ना तुझेफिर क्यों छोड़ा?"
सुधा ने स्कूल से लौट कर आये बेटे के टिफ़िन में बचा हुआ भोजन देख कर हल्की नाराज़गी जतलाई 
चार वर्षीय मोंटू मम्मी को अपना छोटा सा हाथ दिखा - दिखा कर समझाता हुआ बोला -
"
मम्मीमुझे भौत सारा टिफ़िन भर के मत दिया करो मैं छोटा हूँखाते -खाते थक जाता हूँ"
वो भोले अंदाज़ में बोला


"क्योंपापा ने समझाया था खाते हैं तो बड़े हो जाते हैं
"
पापा जितना बड़ामोंटू ने अपना दायाँ हाथ ऊपर उठा कर दिखाया।
"तेरी मैम बच्चों को लंच क्यों नहीं खिलाती
मैं तेरे स्कूल मैम से पूछने जाऊँगी 'सैटर डेको"
"
क्यों मम्मी?" मोंटू के नेत्र अचंभे से फैल गये थे 
"
तेरी मैम से कहूँगीहमारे बेटे का ध्यान रखा करोसारा लंच लौटा लाता है फिर  वो तुझे भी खिलायेगीमम्मी ख़ुश होते हुए बोलीं


ये सुनते ही मोंटू ने अपनी हथेली मम्मी के मुँह पर रख दी 
"
मैम से नहीं कहनास्कूल भी मत आना मम्मी
"
क्यों?"सुधा ने मोंटू की यूनिफार्म की शर्ट बदलवाते हुए पूछा
"सिर्फ  गौरव और शान को खिलाएँगी मैम, अपनी गोदी में बिठाल कर
"
क्यों भाईउन्हें क्योंऔर मेरे लाल को क्यों नहीं?" 
माँ शिकायत भरे  लहज़े में बोल पड़ीं

 

मोंटू ने अपने चेहरे को हथेलियों से छूते हुए कहा -
"
शान और गौरव बहुत गोरे हैं,व्हाइट कलर केऔर शान के तो  गालों में गड्ढे भी पड़ते हैं मम्मी इसलिए  मैम उसे गोद में बैठा कर टिफ़िन  खिलाती हैं"
"
मैं काला हूँ नामेरे गालों में तो डिम्पल भी नहीं पड़ते हैं इसलिए मम्मी ....
मोंटू ने एक अँगुली से अपने गाल में डिम्पल बना कर दिखाया
नन्हें मोंटू का वाक्य खट से फाँससा दिल में जा चुभा, वो तड़प के रह गई

 

उसने बेटे को अपने कलेजे से लगा लिया और बेतहाशा चूमने लगी उसकी आँखें झर रहीं थीं 
"
तू सबसे सुंदर हैमोंटू बच्चेसबसे शुंदर 
तेरी मैम काली"
उसने मम्मी का विरोध किया-
'नो मम्मी नो  गंदी बात'


- विभा रश्मि
 
रचनाकार परिचय
विभा रश्मि

पत्रिका में आपका योगदान . . .
कथा-कुसुम (1)