नवम्बर 2016
अंक - 20 | कुल अंक - 55
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

कविता- अब कर तू विज्ञान की बातें

परी लोक की कथा सुना मत,
ओरी प्यारी-प्यारी नानी।
झूठे सभी भूत के किस्से,
झूठी है हर प्रेत-कहानी।

इस धरती की चर्चा कर तू
बतला नये ज्ञान की बातें।
कैसे ये दिन निकला करता,
कैसे फिर आ जातीं रातें?

क्यों होता यह वर्षा-ऋतु में,
सूखा कहीं-कही पै पानी।
कैसे काम करे कम्प्यूटर,
कैसे चित्र दिखे टीवी पर।

कैसे रीडिंग देता मीटर,
अब कर तू विज्ञान की बातें।
छोड़ पुराने राजा-रानी,
ओरी प्यारी-प्यारी नानी।।


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कविता- माफ करो समधी जी

दूल्हा बनकर, थोड़ा तनकर
खुश थे बंदर भाई,
नाचें संगी-साथी उनके
बजे मधुर  शहनाई।

लिए हाथ में वरमाला इक
बंदरिया फिर आई,
दरवाजे पर दूल्हे राजा-
बंदर को पहनाई।

बदंर का बापू बोला फिर
"बेटी वाले आओ,
क्या दोगे तुम अब दहेज में
उसकी लिस्ट बनाओ।"

गुस्से में आकर ऐसे तब
बोला बेटी वाला-
"अब दहेज का नहीं जमाना
क्या कहते हो लाला।

यदि की अक्कड़-बक्कड़ तुमने
फौरन पुलिस बुलाऊँ,
पाँच साल की फौरन तुमको
अब तो जेल दिखाऊँ।"

बंदर का बापू यह सुनकर
थोड़ा-सा चकराया,
और अपनी गलती पर बेहद
शरमाया, पछताया।

बोला वह बेटी वाले से
"माफ़ करो समधी जी,
माँग दहेज मैंने कर डाली
बहुत बड़ी गलती जी।"


- रमेश राज

रचनाकार परिचय
रमेश राज

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