जून 2016
अंक - 15 | कुल अंक - 55
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

संदेश-पत्र

बेटी की शादी के बाद पिता अपनी बेटी को पत्र लिखता है और उसके बाद बेटी उसका उत्तर भेजती है। आईये देखें किस तरह।

 
पिता का पत्र-
 
प्यारी बेटी, आशीर्वाद
तुम्हारी याद आती है थोड़ी थोड़ी देर बाद
आशा है तुम प्रसन्न होंगी
नए घर गयी हो तो थोड़ी तो सन्न होंगी
तुम्हारी माँ भी तुम्हें बहुत याद करती है
तुम्हारे बारे में रह रह कर संवाद करती है
तुम्हारी छोटी बहना का तो कहना ही क्या
तुमसे मिलने की खातिर
हमसे सारा दिन जिहाद करती है
चलो वो सब तो ठीक है
यहां सब कुछ सटीक है
तुम बताओ वहां सब कैसा है
हमारा दामाद शादी से पहले जैसा था
क्या अब भी वैसा है
न कुछ वहां पे बदला है
खुशियों का आलम कैसा है
मेरी एक बात हमेशा याद रखना
सास ससुर को हमेशा अपने पास रखना
गर न बन पाए कोई दिल से अपना
तो भी डटे रहना अपने कर्तव्यपथ पर
और कभी न कभी उन सबके
अपना होने की आस रखना
याद रखना
दुनिया की ठोकरें खाकर भी
मार्ग में खड़े रहना तुम्हें हमने सिखाया है
इन संस्कारों का हमेशा मान रखना
और स्वर को नीचा रखते हुए
सही और गलत में भेद बता सको
बस हमारी इसी में शान रखना
 
 
 
बेटी को ये पत्र मिलता है। वो अपने पिता को ये उत्तर प्रेषित करती है।
 
प्यारी माँ और प्यारे पापा
सादर नमस्कार
तुम्हें बताना चाहती हूँ
जितना तुम्हें करती थी उस घर में
उतना ही इनसे भी करती हूँ प्यार
यहां सब बहुत ही अच्छे हैं
मन के साफ़ और सच्चे हैं
पर कर्त्तव्य का कोई मोल नहीं होता
इसीलिए बिना ये सोचे
कि किसने कितना पाया कितना खोया
मैं इन सबकी हर बात को
करती हूँ तहे दिल से स्वीकार
हो जाए कोई चूक मुझसे
तो क्षमा मांग लेती हूँ
और उनकी भूल को भी
मैं मूक मय हो सुधार लेती हूँ
क्योंकि
मेरी हर शिक्षा और संस्कार में
तुम्हारा ही सीखा सिखाया है
तेज भंवर से कैसे निकलना है
मेरे पापा ये आपने ही तो सिखाया है
इसीलिए अपनी इस लाड़ली बेटी पर
इतना जरूर विश्वास करना
गर दिख भी जाएँ आंसू मेरे
तो भी तनिक न त्रास करना
मैं भी आपको नदी का जल बन दिखाउंगी
हवा के वेग संग बहना भी आपने ही सिखाया है।
छोटी बहना को स्नेह
माँ और आपको प्रणाम नेति नेति
आपकी सबसे प्यारी बेटी।

- महेश कुमार माटा

रचनाकार परिचय
महेश कुमार माटा

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