मार्च 2016
अंक - 12 | कुल अंक - 54
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविताएँ
हम
 
लेख
कविता
उपन्यास
कहानी
शोध
अब तक लिखा जा चुका है
इन सब में
हमारे बारे में
बहुत कुछ
हर कोई अपनी नज़र से
देखता-समझता है
हज़ारों लोग मिलने आते हैं
पूछ्ते हैं हमारे बारे में
अनेक सवाल
करते हैं आश्चर्य
हमारे वर्तमान पर
कुछ तो मुँह बना लेते हैं
जैसे कुछ कड़वा खाया हो
पर
कोई नहीं पहुँच पाता
हमारे दर्द तक
हर पल नई दिखने की
हमारी मानसिकता तक
कोई नहीं समझना चाहता
कितनी तकलीफ होती है
हर बार
बार-बार
हमारी ऊब
उसकी तो कोई कीमत ही नहीं
ऊब तो सिर्फ मर्द को होती है
इसलिये बना दी जाती हैं
हम
हर बार
बार-बार
 
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नयापन
 
नयेपन की चाहत
हर बार देती है तकलीफ मुझे
तुम चाहते हो
उदारता मुझसे
क्यों और कैसे?
 
क्या तुम जानते हो
तुम्हें पाने के बाद
हर बार
हर पल
बदली हूँ मैं।
 
मेरा अस्तित्व 
तुममय हो गया है।
छिन गया सबकुछ
नाम
पता
माँ-बाप
पहचान
आदत
बचपन
बदल गई मैं
क्यों न बुरा लगे मुझे
क्या तुमने कभी
बदला है खुद को मेरे लिए?
 
तुम्हारी दिनचर्या चलती है
वैसी ही
कुछ छिना है तुमसे?
फिर भी तुम कहते हो
तुम्हें बुरा नहीं लगना चाहिए
ये प्रकृति है मेरी जाति की
 
कब तक?
तुम्हारी नयेपन की चाहत
देती रहेगी तकलीफ मुझे

- आरती रानी प्रजापति

रचनाकार परिचय
आरती रानी प्रजापति

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