प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जून 2019
अंक -52

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल-वाटिका

पेड़

पेड़ हमें छाया देता है
शुद्ध हवा भी देता है
मीठे-मीठे फल वह देता
हमसे कुछ न लेता
कागज, कपड़ा, रबड़ वह देता
रोज हमें डाली पर बैठाता है
रोज झूला झूलाता है
उस पेड़ की छाया में हम बैठते हैं
सब पेड़ को पालते हैं


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मेंढक

मेंढक गया तैरने
पानी में करने छपाक-छप छपाक-छप
खुश होकर वो टर्राया
बोला टर्र-टर्र टर्र-टर्र
मछली आई उसके पास
आज वो हो रही थी उदास
मेंढ़क ने फिर उसे हँसाया
खुशी-खुशी जीना सिखाया
हरे रंग का मैं हूँ मेंढ़क
उछल-उछल के चलता हूँ
पानी और जमीन दोनों पर मैं रहता हूँ
कीट-पतंगें खाता हूँ
हरी पत्तियों में छुप जाता हूँ


- आदित्यराज सिंह
 
रचनाकार परिचय
आदित्यराज सिंह

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बाल-वाटिका (1)