प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जून 2019
अंक -50

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

रिवाज़ नहीं है

हमने पेड़ों को काटा
जानवरों को मारा
झरनों को सुखाया
नदियों का रास्ता बदला
आसमानों में
तैनात किए हथियार
हमने उन सबको
प्रताड़ित किया
जिनके पास
बदला लेने का रिवाज़ नहीं है

पूरी प्रकृति के साथ
अपना खेल खेलकर
अब हमारा निशाना
किसानों पर है

ईश्वर से मेरी प्रार्थना
हमेशा शब्द की रही है
मुझसे पहले
सबसे पहले
इन्हें देना


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हम वृक्ष नहीं हो पाते

वृक्ष देता है साथ
बन जाता है पृष्ठ
या जल जाता है साथ
दबायी गयी देह से
जुड़ जाती हैं कहीं
उसकी जड़ें

इतना पास होते हुए भी
हम वृक्ष नहीं हो पाते
चुप खड़े रहने से अमरता
परे है हमारी समझ से

वृक्ष न हो पाने से ही
हम करते हैं हत्याएँ


- अमरदीप
 
रचनाकार परिचय
अमरदीप

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कविता-कानन (2)