प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
महिला ग़ज़ल अंक
अंक -52

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव
ग़ज़ल-
 
बैठ कर अब ये बता किस्सा है क्या
तेरे दिल में भी कोई रहता है क्या
 
यार ख़ुशबू जानी-पहचानी सी है
इस गली से आज वो गुज़रा है क्या
 
जागते में तू है, सोते में भी तू
मेरी आँखों में तेरा पहरा है क्या
 
कितना दीवाना था शैदाई मेरा
प्यार मुझसे आज भी करता है क्या
 
आपको क्या याद आती है मेरी
आपसे मैंने कभी पूछा है क्या
 
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ग़ज़ल-
 
चाँद-तारे दरमियाँ हों
आँखों में कुछ मस्तियाँ हों
 
ख़्वाहिशों के पंख लेकर
आई तेरी चिट्ठियाँ हों
 
लाज़िमी है तेरे-मेरे
बीच थोड़ी दूरियाँ हों
 
प्यार से देखो तो शायद
हर किसी में ख़ूबियाँ हों
 
है नमी फूलों में, शायद
रात रोई पत्तियाँ हों
 
ख़ार हों, गुल हो चमन में
बस मयस्सर तितलियाँ हों

- रेणु मिश्रा
 
रचनाकार परिचय
रेणु मिश्रा

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ग़ज़ल-गाँव (2)